एक हसीना थी
#प्रतियोगिता
विषय:- एक हसीना थी
ना कोई सुर्खाब के पंख लगे थे
ना चटक उसकी चांदनी थी
वो एक सीधी-सादी साधारण सी लड़की
पर मेरी नजर से देखो तो एक हसीना थी
आंखों में झील सी गहराई नहीं
बस नमी की दो बूंदे थी
मोतियों की चमक ना सही
मगर उस नमी में गंगा सी निर्मलता थी
वो एक सीधी सादी साधारण सी लड़की
पर मेरी नजर से देखो तो एक हसीना थी
उसकी सोने सी काया नहीं
बस सांवले रंग में थोड़ी सादगी थी
उसके आधारों में चंचलता ना सही
मगर बोली में उसकी मधुरस सी मिठास थी
वो एक सीधी सादी साधारण सी लड़की
पर मेरी नजर से देखो तो एक हसीना थी
जाने कैसे मेरी आंखों में बसी उसकी खूबसूरती थी
या फिर बस ये मेरे प्रेम की रहराई थी
वो एक सीधी सादी साधारण सी लड़की
पर मेरी नजर से देखो तो एक हसीना थी
नाम:- कल्पनाओं की कवियत्री (PG)
स्वरचित रचना
Pratikhya Priyadarshini
04-Dec-2022 10:30 PM
Very nice 🌺👍
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Sachin dev
04-Dec-2022 10:45 AM
Well done
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Abhinav ji
04-Dec-2022 09:33 AM
Very nice 👍
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